PMS - 2026
PMS | Post Matric Scholarship
PMS छात्रवृत्ति क्या है?
| यह छात्रवृत्ति उन छात्रों को दी जाती है जो अपनी 10वीं कक्षा (मैट्रिक) पास कर चुके हैं और आगे की पढ़ाई (11वीं, 12वीं, स्नातक, स्नातकोत्तर, आईटीआई, पॉलिटेक्निक या बी.एड) कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को शिक्षा जारी रखने में मदद करना है। |
आवेदन के लिए पात्रता (Eligibility)
| निवास: आवेदक बिहार राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए। जाति: छात्र SC, ST, BC या EBC श्रेणी से संबंधित होना चाहिए। पारिवारिक आय: वार्षिक पारिवारिक आय ₹3,00,000 (3 लाख रुपये) से अधिक नहीं होनी चाहिए। शैक्षणिक योग्यता: छात्र ने कम से कम 10वीं कक्षा पास की हो और किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में नामांकित हो। |
जरूरी दस्तावेज (Required Documents)
| आवेदन करते समय आपके पास निम्नलिखित कागजात तैयार होने चाहिए: आधार कार्ड बिहार का निवास प्रमाण पत्र (Residential Certificate) जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate) आय प्रमाण पत्र (Income Certificate – हाल ही का बना हुआ) बोनाफाइड सर्टिफिकेट (Bonafide Certificate – आपके कॉलेज/स्कूल से मिलेगा) फीस रसीद (Fee Receipt – कॉलेज में जमा की गई फीस की पर्ची) अंतिम परीक्षा की मार्कशीट (जैसे 10वीं या पिछले वर्ष की मार्कशीट) बैंक पासबुक (बैंक खाता आधार से सीडेड/जुड़ा होना अनिवार्य है) |
आवेदन कैसे करें?
| बिहार के छात्रों के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट pmsonline.bih.nic.in है। पंजीकरण (Registration): सबसे पहले छात्र को पोर्टल पर जाकर अपना विवरण भरना होता है। दस्तावेज अपलोड: लॉगिन करने के बाद फोटो, सिग्नेचर और सभी जरूरी सर्टिफिकेट अपलोड करने होते हैं। सत्यापन (Verification): आपके आवेदन की जाँच पहले आपके कॉलेज द्वारा, फिर जिला स्तर पर और अंत में विभाग द्वारा की जाती है। भुगतान: सत्यापन सफल होने के बाद छात्रवृत्ति की राशि सीधे छात्र के आधार लिंक बैंक खाते (DBT के माध्यम से) में भेज दी जाती है। |
PMS छात्रवृत्ति का विस्तृत विवरण
| यह योजना भारत सरकार और राज्य सरकारों (जैसे बिहार सरकार) द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मेधावी छात्र केवल पैसों की कमी के कारण अपनी उच्च शिक्षा (Higher Education) न छोड़े। |
बोनाफाइड सर्टिफिकेट और फीस रसीद (Bonafide & Fee Receipt)
| यह दो दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण हैं: बोनाफाइड सर्टिफिकेट: यह आपके कॉलेज द्वारा दिया जाता है, जो यह प्रमाणित करता है कि आप उस कॉलेज के नियमित छात्र हैं। इसमें आपका रोल नंबर और कोर्स की अवधि लिखी होती है। फीस रसीद: इसमें कॉलेज की पूरी फीस का विवरण (जैसे एडमिशन फीस, ट्यूशन फीस, लाइब्रेरी फीस) होना चाहिए। इसी के आधार पर सरकार तय करती है कि आपको कितना पैसा वापस मिलेगा। |
आवेदन रिजेक्ट होने के सामान्य कारण
| कई बार छात्र छोटी गलतियां करते हैं जिससे उनका पैसा नहीं आता: आय प्रमाण पत्र पुराना होना: आय प्रमाण पत्र हमेशा लेटेस्ट (6 महीने के अंदर का) होना चाहिए। नाम में अंतर: आधार कार्ड, बैंक खाता और मार्कशीट में नाम की स्पेलिंग एक जैसी होनी चाहिए। अधूरे दस्तावेज: बोनाफाइड सर्टिफिकेट पर कॉलेज की मुहर या प्रिंसिपल के हस्ताक्षर न होना। गलत कैटेगरी: SC छात्र का BC कैटेगरी में आवेदन करना। |
पैसा कब और कैसे आता है?
| आवेदन करने के बाद, फॉर्म की तीन स्तरों पर जांच होती है: संस्थान स्तर (Institute Level Verification): आपका कॉलेज चेक करता है कि आप वहां पढ़ते हैं या नहीं। जिला स्तर (Physical Verification/DPU): जिले के अधिकारी कॉलेज जाकर या ऑनलाइन डेटा चेक करते हैं। भुगतान (Payment): सब कुछ सही पाए जाने पर पैसा DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे आपके खाते में आता है। |
बोनाफाइड सर्टिफिकेट बनवाने के मुख्य फायदे और कारण दिए गए हैं:
| 1. छात्रवृत्ति (Scholarship) के लिए अनिवार्य बिना बोनाफाइड सर्टिफिकेट के आप PMS (Post Matric Scholarship) या किसी भी सरकारी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर सकते। सरकार को यह सुनिश्चित करना होता है कि जो पैसा भेजा जा रहा है, वह एक असली छात्र के पास ही जाए। 2. फीस की वापसी का आधार बोनाफाइड सर्टिफिकेट में आपके कोर्स का नाम, वर्तमान वर्ष (जैसे 1st Year या 2nd Year) और आपके कोर्स की कुल अवधि लिखी होती है। इसी को देखकर विभाग यह तय करता है कि आपकी कितनी फीस माफ होगी या आपको कितनी राशि दी जाएगी। 3. बैंक खाता और अन्य लाभ स्टूडेंट बैंक अकाउंट: कई बार बैंक में ‘जीरो बैलेंस’ छात्र खाता खुलवाने के लिए बोनाफाइड की जरूरत पड़ती है। एजुकेशन लोन: अगर आप पढ़ाई के लिए बैंक से लोन लेना चाहते हैं, तो बैंक सबसे पहले आपसे बोनाफाइड सर्टिफिकेट ही मांगेगा। 4. रियायती पास (Concession Pass) अगर आप बस या ट्रेन से कॉलेज आते-जाते हैं, तो स्टूडेंट कंसेशन पास (Student Pass) बनवाने के लिए बोनाफाइड सर्टिफिकेट दिखाना पड़ता है। इससे आपके सफर का किराया काफी कम हो जाता है। 5. पहचान के प्रमाण के रूप में जब तक आपको कॉलेज से परमानेंट आईडी कार्ड (ID Card) नहीं मिल जाता, तब तक बोनाफाइड सर्टिफिकेट ही आपकी आधिकारिक पहचान के रूप में काम करता है। बोनाफाइड सर्टिफिकेट में क्या-क्या होना चाहिए? यदि आप इसे अपने कॉलेज से बनवा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि उसमें ये चीजें जरूर हों: संस्थान का लेटरहेड: कॉलेज के आधिकारिक कागज पर प्रिंट होना चाहिए। पंजीकरण संख्या (Registration/Roll No): आपका रोल नंबर साफ लिखा हो। प्रिंसिपल के हस्ताक्षर: कॉलेज के प्रधानाचार्य या अधिकृत अधिकारी के साइन। कॉलेज की मुहर: बिना राउंड स्टैम्प (गोल मुहर) के यह मान्य नहीं होता। तारीख: यह हाल ही की तारीख में जारी किया गया होना चाहिए। एक जरूरी सलाह: PMS पोर्टल पर आवेदन करते समय कॉलेज से मिला ओरिजिनल बोनाफाइड ही स्कैन करके अपलोड करें। फोटोकॉपी अपलोड करने पर फॉर्म रिजेक्ट होने का डर रहता है। |
Post-Matric Scholarship जाँच
| 1. संस्थान स्तर पर जाँच (Institute Verification) सबसे पहले आपका आवेदन आपके अपने कॉलेज या स्कूल के पास डिजिटल रूप में जाता है। क्या जाँच होती है: कॉलेज के नोडल ऑफिसर यह देखते हैं कि क्या आप वाकई उनके यहाँ पढ़ रहे हैं? आपका बोनाफाइड सर्टिफिकेट और फीस रसीद असली है या नहीं? स्टेटस: यहाँ से पास होने पर पोर्टल पर ‘Institute Approved’ दिखाई देता है। 2. भौतिक सत्यापन (Physical Verification) बिहार पीएमएस पोर्टल में एक विशेष टीम बनाई जाती है जो भौतिक रूप से डेटा की जाँच करती है। क्या जाँच होती है: यह टीम कॉलेज के रिकॉर्ड और आपके द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों का मिलान करती है ताकि कोई फर्जीवाड़ा न हो। स्टेटस: इसके बाद पोर्टल पर ‘Physical Verified’ लिखा हुआ आता है। 3. जिला शैक्षणिक चेकर (District Academic Checker) जिला स्तर पर एक अधिकारी (Checker) आपके सभी प्रमाणपत्रों की बारीकी से जाँच करता है। क्या जाँच होती है: आपकी जाति (Caste), आय (Income) और निवास (Residence) प्रमाण पत्र सही और वैध हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाता है कि आपकी पारिवारिक आय तय सीमा के अंदर है। स्टेटस: यहाँ से पास होने पर ‘District Academic Checked’ दिखता है। 4. जिला शैक्षणिक अप्रूवर (District Academic Approver) चेकर के बाद जिले का एक वरिष्ठ अधिकारी (Approver) अंतिम मुहर लगाता है। स्टेटस: जब यह स्तर पार हो जाता है, तो आपका फॉर्म जिले की ओर से पूरी तरह सुरक्षित और सही मान लिया जाता है। इसके बाद स्टेटस ‘District Academic Approved’ हो जाता है। 5. भुगतान की स्थिति (Payment Status & DBT) यह सबसे आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। PFMS जाँच: बैंक सॉफ्टवेयर (PFMS) यह चेक करता है कि आपका बैंक खाता चालू है और वह आधार कार्ड से लिंक (Seeded) है या नहीं। फाइनल अप्रूवल: सब कुछ सही मिलने पर सरकार की ओर से बजट जारी किया जाता है और स्टेटस ‘Ready for Payment’ या ‘Payment Under Process’ दिखाने लगता है। महत्वपूर्ण बातें: आधार सीडिंग: अगर आपका बैंक खाता आधार से नहीं जुड़ा है, तो पैसा ‘Rejected’ हो सकता है। इसे अपने बैंक जाकर तुरंत चेक करवाएं। रिजेक्शन (Rejection): अगर किसी भी लेवल पर फॉर्म रिजेक्ट होता है, तो आपको पोर्टल पर लॉगिन करके उसका कारण देखना चाहिए। कई बार सुधार (Correction) का मौका दिया जाता है। |
आधिकारिक पोर्टल लिंक:
| आधिकारिक पोर्टल | Click Here |
| New Students Registration | Link – I | Link – II | Link – III |
| Defective Application | Click Here |
| Student Application Status | Click Here |
SC/ST Portal
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| New Students Registration | Link – I | Link – II | Link – III |
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आवेदन की प्रक्रिया (Step-by-Step)
| आवेदन प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है। यहाँ मुख्य चरण दिए गए हैं: Step 1: छात्र पंजीकरण (Student Registration): सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी श्रेणी (SC/ST या BC/EBC) चुनकर पंजीकरण करना होता है। यहाँ आपको अपना नाम, आधार नंबर और मोबाइल नंबर देना होगा। Step 2: व्यक्तिगत विवरण (Personal Details): पंजीकरण के बाद आपको अपनी फोटो, पता और माता-पिता का विवरण भरना होगा। Step 3: बैंक विवरण (Bank Details): यहाँ बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। बैंक खाता छात्र के नाम पर होना चाहिए और NPCI (Aadhaar Seeding) से लिंक होना अनिवार्य है। Step 4: शैक्षणिक विवरण (Academic Details): आपको अपने वर्तमान कॉलेज का नाम, कोर्स का नाम, रोल नंबर और पिछले साल के अंक (Marks) भरने होंगे। Step 5: दस्तावेज अपलोड (Document Upload): आय, जाति, निवास और बोनाफाइड सर्टिफिकेट को स्कैन करके अपलोड करना होता है। Step 6: फाइनलाइज (Finalize): अंत में सभी जानकारी को जांचकर ‘Final Submit’ करना होता है। इसके बाद आपको एक रसीद (Application Receipt) मिलेगी। |
बिना लॉगिन किए स्टेटस चेक करने का तरीका
| 1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmsonline.bih.nic.in पर जाएं। 2. होम पेज पर अपनी कैटेगरी के अनुसार लिंक पर क्लिक करें (जैसे: BC & EBC Students Click Here या SC & ST Students Click Here)। 3. अब अगले पेज पर “Verify Your Application Status” का एक विकल्प दिखेगा, उस पर क्लिक करें। 4. अब एक नया पेज खुलेगा जहाँ आपको कुछ जानकारी भरनी होगी: Filter By: यहाँ आप Aadhar Number, Mobile Number या User ID में से कोई भी एक चुन सकते हैं। Value: जो आपने ऊपर चुना है (जैसे आधार नंबर), उसे यहाँ टाइप करें। Date of Birth: अपनी जन्मतिथि डालें। अंत में ‘Search’ बटन पर क्लिक करें। लॉगिन करके स्टेटस कैसे देखें? अगर आप विस्तार से देखना चाहते हैं कि आपका फॉर्म किस लेवल पर रुका है, तो यह तरीका अपनाएं: 1. पोर्टल पर जाकर “Registered User Login” पर क्लिक करें। 2. अपना User ID और Password डालकर लॉगिन करें। 3. लॉगिन होने के बाद डैशबोर्ड पर ही आपको आपके आवेदन की पूरी स्थिति दिखाई देगी। 4. वहाँ आपको अलग-अलग कॉलम दिखेंगे जैसे: Institute Status Physical Verification Status District Academic Status Payment Status |
PMS (Post-Matric Scholarship) आवेदन Reject (अस्वीकार) हो गया है
| 1. रिजेक्शन का कारण पता करें (Check Reason) सबसे पहले यह जानें कि फॉर्म किस वजह से रिजेक्ट हुआ है। पोर्टल पर अपनी User ID और Password से लॉगिन करें। अपने आवेदन के स्टेटस (Application Status) पर जाएं। जिस लेवल पर ‘Rejected’ लिखा है (जैसे Institute या District), उसके बगल में “Remarks” या “Reason” लिखा होगा। सामान्य कारण: आय प्रमाण पत्र पुराना होना, बोनाफाइड पर मुहर न होना, या बैंक खाता आधार से लिंक न होना। 2. गलती से सुधार करें (Correction) एक बार कारण पता चलने पर, उसे ठीक करें: दस्तावेज की गलती: अगर डॉक्यूमेंट गलत बताया गया है, तो नया और सही डॉक्यूमेंट (जैसे नया Income Certificate) बनवाएं। बैंक की गलती: अगर ‘Bank Rejected’ है, तो तुरंत बैंक जाकर अपना Aadhaar Seeding (NPCI Mapping) करवाएं। टाइपिंग की गलती: अगर नाम या जन्मतिथि गलत है, तो उसे प्रोफाइल में जाकर सुधारें। 3. डॉक्यूमेंट दोबारा अपलोड करें (Re-upload) लॉगिन करने के बाद “Edit Application” या “Upload Documents” वाले विकल्प पर जाएं। पुराने (गलत) डॉक्यूमेंट को हटाकर नया स्कैन किया हुआ डॉक्यूमेंट अपलोड करें। ध्यान रहे कि फाइल साफ (Clear) दिखे, वरना फिर से रिजेक्ट हो सकता है। 4. फॉर्म को दोबारा ‘Finalize’ करें सिर्फ सुधार करने से काम नहीं चलेगा। सुधार करने के बाद आपको फॉर्म को फिर से Finalize करना होगा। जब आप सभी सुधार कर लें, तो ‘Final Submit’ या ‘Finalize Application’ बटन पर क्लिक करें। आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा, उसे डालकर सबमिट करें। इसके बाद ही आपका फॉर्म फिर से जाँच (Verification) के लिए अधिकारियों के पास जाएगा। कुछ जरूरी बातें: कॉलेज से संपर्क करें: अगर आपके कॉलेज (Institute) ने रिजेक्ट किया है, तो अपने कॉलेज के स्कॉलरशिप प्रभारी (Nodal Officer) से मिलें और उन्हें सही दस्तावेज दिखाएं। वे उसे वहां से ‘Approve’ कर देंगे। समय सीमा (Deadline): सुधार का काम जल्द से जल्द करें, क्योंकि पोर्टल बंद होने के बाद सुधार का मौका नहीं मिलता। आधार लिंकिंग: यदि बैंक की वजह से रिजेक्शन है, तो सुधार के बाद स्टेटस अपडेट होने में 10-15 दिन का समय लग सकता है। |
PMS (Post-Matric Scholarship) स्टेटस ‘Defective’ (त्रुटिपूर्ण) हो गया है
| 1. सुधार का कारण (Defect Reason) देखें सबसे पहले यह जानें कि जाँच अधिकारी ने आपके फॉर्म में क्या कमी निकाली है। आधिकारिक पोर्टल पर अपनी User ID और Password से लॉगिन करें। अपने डैशबोर्ड पर ‘Application Status’ पर क्लिक करें। जहाँ ‘Defective’ लिखा है, उसके बगल में ‘Remarks’ या ‘Reason’ का एक कॉलम होगा। वहाँ अधिकारी ने साफ लिखा होगा कि क्या कमी है (जैसे: “Bonafide not clear”, “Income certificate expired”, या “Marksheet mismatch”)। 2. जरूरी बदलाव करें (Edit Application) कारण पता चलने के बाद, सुधार की प्रक्रिया शुरू करें: दस्तावेज की समस्या: अगर मार्कशीट, आय, जाति या निवास प्रमाण पत्र में गलती है, तो नया और साफ स्कैन किया हुआ दस्तावेज तैयार रखें। विवरण में गलती: अगर नाम, पिता का नाम, या जन्मतिथि में गलती है, तो ‘Update Student Profile’ में जाकर उसे ठीक करें। कॉलेज विवरण: अगर फीस रसीद या बोनाफाइड में गलती है, तो कॉलेज से नया बनवाकर अपलोड करें। 3. सुधार के बाद ‘Finalize’ करना न भूलें यह सबसे महत्वपूर्ण स्टेप है। केवल डॉक्यूमेंट अपलोड करने से काम नहीं चलेगा: अपनी कमियों को सुधारने के बाद, ‘Finalize Application’ बटन पर क्लिक करें। आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। ओटीपी डालकर फॉर्म को फिर से सबमिट करें। ध्यान दें: जब तक आप दोबारा ‘Finalize’ नहीं करेंगे, आपका फॉर्म अधिकारियों के पास दोबारा जाँच के लिए नहीं जाएगा। 4. कॉलेज के नोडल ऑफिसर से मिलें अगर आपका फॉर्म कॉलेज स्तर (Institute Level) पर ‘Defective’ हुआ है, तो सुधार करने के बाद अपने कॉलेज के स्कॉलरशिप प्रभारी (Nodal Officer) से बात करें। उन्हें बताएं कि आपने सुधार कर दिया है, ताकि वे उसे तुरंत आगे बढ़ा (Verify) सकें। |
सामान्य ‘Defect’ और उनके समाधान:
| समस्या (Defect) | समाधान (Solution) |
| Documents not readable | अच्छी क्वालिटी में स्कैन करके फिर से अपलोड करें। |
| Income Certificate old | नया आय प्रमाण पत्र बनवाकर अपलोड करें। |
| Fee Receipt mismatch | कॉलेज से सही फीस रसीद लेकर दोबारा अपलोड करें। |
| Course duration wrong | शैक्षणिक विवरण (Academic Details) में जाकर साल सुधारें। |
आधार सीडिंग (Aadhaar Seeding) और DBT
| यह सबसे बड़ी वजह है जिससे 50% छात्रों का पैसा रुक जाता है। आधार लिंकिंग vs आधार सीडिंग: सिर्फ बैंक खाते में आधार नंबर देना काफी नहीं है। आपका खाता NPCI (National Payments Corporation of India) के साथ ‘सीडेड’ होना चाहिए। जाँच कैसे करें: आप आधार की वेबसाइट (UIDAI) पर जाकर ‘Bank Seeding Status’ चेक कर सकते हैं। अगर यह ‘Active’ नहीं है, तो तुरंत बैंक जाकर e-KYC और DBT Form भरें। 2. छात्रवृत्ति की राशि का गणित (Calculation) बहुत से छात्रों को लगता है कि उन्हें पूरी कॉलेज फीस वापस मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं है: सरकारी कॉलेज: यहाँ लगभग पूरी फीस (Tution Fee + Non-Refundable Fee) वापस मिल जाती है। प्राइवेट कॉलेज: सरकार ने अलग-अलग कोर्स के लिए एक अधिकतम सीमा (Upper Limit) तय की है। मान लीजिए आपकी फीस ₹50,000 है, लेकिन सरकार ने उस कोर्स के लिए ₹15,000 की सीमा तय की है, तो आपको ₹15,000 ही मिलेंगे। 3. ‘Renewal’ और ‘Fresh’ आवेदन में अंतर Fresh (नया): जब आप किसी नए कोर्स (जैसे ग्रेजुएशन के पहले साल) में एडमिशन लेते हैं, तो ‘Fresh’ आवेदन करना होता है। Renewal (नवीनीकरण): जब आप उसी कोर्स के दूसरे या तीसरे साल में जाते हैं, तो आपको दोबारा नया रजिस्ट्रेशन नहीं करना पड़ता। आपको बस अपनी पुरानी User ID से लॉगिन करके अगले साल का विवरण (जैसे सेकंड ईयर की फीस रसीद) अपडेट करना होता है। 4. सत्र (Session) का ध्यान रखें बिहार पीएमएस पोर्टल पर अक्सर एक साथ दो-तीन सालों के आवेदन खुले रहते हैं (जैसे 2023-24, 2024-25 और 2025-26)। आवेदन करते समय ध्यान दें कि आप सही सत्र का चुनाव कर रहे हैं। गलत साल चुनने पर फॉर्म सीधा रिजेक्ट हो जाता है। 5. ईमेल और मोबाइल नंबर अपडेट रखें विभाग समय-समय पर आपके फॉर्म की स्थिति के बारे में SMS भेजता है। अगर आपका नंबर बंद है, तो आपको ‘Defective’ या ‘Rejected’ होने की सूचना नहीं मिलेगी और सुधार की तारीख निकल जाएगी। समय-समय पर (हफ्ते में एक बार) पोर्टल पर Login करके स्टेटस खुद चेक करते रहें। 6. आवश्यक प्रमाणपत्रों की वैधता (Validity) आय प्रमाण पत्र (Income Certificate): यह हमेशा आवेदन की तारीख से 6 महीने या 1 साल (जैसा पोर्टल पर लिखा हो) के अंदर का होना चाहिए। पुराने आय प्रमाण पत्र पर पैसा नहीं मिलता। निवास और जाति: ये एक बार बन जाने पर काफी समय तक चलते हैं, लेकिन आय प्रमाण पत्र हर साल नया बनवाना सबसे सुरक्षित रहता है। 7. शिकायत कहाँ करें? (Help Desk) अगर आपका फॉर्म बिना किसी कारण के बहुत समय से पेंडिंग है या आपको कोई तकनीकी समस्या आ रही है, तो आप: पोर्टल पर दिए गए Helpdesk Email पर अपनी User ID और समस्या लिखकर मेल कर सकते हैं। अपने जिले के BC/EBC कल्याण विभाग (District Welfare Office) में जाकर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। |